केवल में और तुम
सांवले सायों में, चमकीले छायों में, कोमल अदाओं में, सिमटते में और तुम। सागर की लहरों में, भीगी सी सेहरों में, प्रेम की पहरों में, बसते में और तुम। चंचल पवन में उड़ते गगन में हाथों में हाथ लिए, चलते केवल में और तुम।
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