संगिनी
मेरे जीवन की चमक भरी किरणें हो, जो अंधियारे को दूर भगाती हैं। मरुस्थल में बहती नदी हो, पतझड़ जैसे मौसम को बसंत बनाती हैं। साथ चलने वाली संगिनी हो, जो मुश्किल पथ पर साथ रहती है। जीवन में साथ देने वाली अर्धांगिनी हो, जो दुख सुख में हाथ पकड़ के रखती है। मेरे जीवन की वो शक्ति हो, हर परिस्थिति में मुझे मजबूत बनाती हैं। तुम उपवन के फूलों सी हो, जो आंगन को खुशबू से भर देती हैं। सर्द सुबह सी तुम शांति हो, जो दिन के तनाव को दूर करती हैं। मानसून की पहली बारिश हो, ग्रीष्म की तप्त को दूर करती हैं। मेरे हर मर्ज की दवा हो, जो हर बीमारी ठीक करती है। आसमान में खिले इंद्रधनुष जैसी हो, जो मेरे जीवन में खुशियों के रंग भरती है। गहरे पेड़ की तुम छांव हो, जो चेहरे की उदासी दूर करती है, चमकीले चंद्र की चांदी सी चांदनी हो, जो जीवन के हर भाग को प्रकाश से भरती है।
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