मेरियाना गर्त सी तेरी आँखें।।
ये तुम्हारी आँखें हैं या मेरियाना गर्त की खाई इनमें डूबा ही ऐसे जैसे याद तेरी आई चाहे जितने जाम पी जाऊं नशा चढ़ता ही नहीं जो खोया तेरी टिमटिमाती आंखों में ये नशा कमबख्त उतरता भी नहीं इन शहद सी नरम पलकों को जो भीगों दूं मैं अपने अधरों से तो तुम रूठ न जाना मधुमक्खियों के छत्तों से सोचा किसी नशे में अब सरोबार हुआ जाए मचलती तेरी आंखों में दो से चार हुआ जाए उफ़्फ़! ये जुल्फें भी तेरी बड़ी चुगलखोर निकली छोर पलकों का साथ कानों का दामन थाम भाग निकली फिर क्या हमने भी इन नशीली आंखों को देखा बड़े ही गौर से अब लगा मानो डूब ही जाएं इस दौर से नशे की न थी हमको आदत कभी इन कातिल निगाहों ने बनाया घायल अभी ये तुम्हारी आँखें हैं या मेरियाना गर्त की खाई इनमें डूबा ही ऐसे जैसे याद तेरी आई।।
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