पूर्वांचल
पूर्वांचल जहां आज भी सनातन संस्कृतियों का वास है जहां आज भी हर घरों में बुजुर्गों का निवास है पूर्वांचल जहां हर शुभ काम से पहले मां दही और चीनी खिलाती है जहां महिलाएं आज भी संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक लोकगीत गुनगुनाती हैं। जहां के लोग शस्त्र और शास्त्र दोनों ने निपुड होते हैं पूर्वांचल जहां शिववतारी बाबा गोरखनाथ विराजते हैं। और दुनिया दीवानी है उगते हुए सूर्य की,पर वो पूर्वांचल ही है जहां के लोग डूबते सूर्य को अर्ध चढ़ते हैं।
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