तुम
मैं बिल्कुल वैसी हूँ तुम्हारे बिना... जैसे मछली को जल न मिले जैसे भविष्य को कल न मिले जैसे रातें बिन तारों के जैसे लहरें बिन किनारों के जैसे सावन बिन बारिश के जैसे मन हो बिन ख्वाहिश के जैसे जीवन का सार न हो जैसे कोई संसार न हो. जैसे दुर्बल हो सहारे बिना मैं बिल्कुल वैसी हूँ तुम्हारे बिना...
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