शब-ए-हिज्र
इहानत-ए-इश्क के बाद, सोज़-ए-इंतज़ार सहने के बाद, तनहाई में गुजरी शब-ए-हिज्र के बाद, तुम अगर लौट भी आओ तो शायद तुम्हे पाने की खुशी से ज़्यादा अब उसका ग़म होगा मुझे || श्रेयांश
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