शीर्षक -: हजारीबाग अधिवेशन
सफर की शुरुआत तो वहां से है मित्र जहां प्रेम की नदी तथा यादों की दरिया बहती है मै उस दुमका शहर से आता हूं जो चल पड़ा हूं एक नई शहर एक नई उमंग के साथ एक बड़ा छात्र समागम की ओर हां मैं चल पड़ा हूं हजारीबाग अधिवेशन की ओर बस में बैठ कर उस पुरानी यादों को समेट कर मै चल पड़ा हूं हजारीबाग की ओर सोचता हूं कि फिर हजारीबग की उस नई यादों के सहारे घर को लौटूंगा। हां मै चल पड़ा हूं हजारीबाग अधिवेशन की ओर मनोज सोरेन✍️✍️
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