बॉलीवुड के करिश्में
कविता: बॉलीवुड के करिश्मे कवि: विजय शर्मा एरी (Vijay Sharma Erry) 1. चमकते चांद से चेहरे, झिलमिल सितारों की रात, बॉलीवुड है सपनों का जहान, जहां हर पल है बात। स्टेज पे मुस्कानें बिखरें, पर्दे पे रुलाती बात, हर दिल को छू जाए, फिल्मों की जादुई सौगात। 2. यहां अमर हो जाते हैं वो, जो छू लें दिल की डोर, नाम हो, न fame हो — फिर भी चले हर ओर। अमिताभ से लेकर दीपिका तक, सबके हैं अपने रंग, पर पीछे छुपा है गहरा दर्द, जो न दिखे किसी संग। 3. धन, यश, वैभव सब कुछ, मिलती है शोहरत खास, लेकिन दिल की तन्हाई में, टूटता है हर एहसास। ड्रग्स की लत, झूठी हँसी, रिश्तों की होती हार, कभी सपनों की दुनिया, अब बनती है सांझा व्यापार। 4. कास्टिंग काउच की आग में, जलते कितने अरमान, बिना गॉडफादर के यहां, मुश्किल है पहचान। नेपोटिज़्म की दीवारें, हर टैलेंट को रोकती हैं, जो लड़ते हैं खुद से, वही मुक़द्दर को टोकते हैं। 5. मीडिया की लहरों में, बह जाती है प्राइवेसी, हर मुस्कान के पीछे छिपी, एक अदृश्य ट्रेजेडी। सफलता का बोझ ऐसा, हँसी भी लगती फरेब, गुमनामी की गहराइयों में, खो जाते हैं कई चेहरों के वेब। 6. फिर भी हर रोज़ कोई नया, चलता है इस डगर, उम्मीद लिए, आँखों में सपने, कदम रखे बेखबर। बॉलीवुड है जादू, करिश्मा, एक ताज, एक दरबार, मगर ज़रा संभल के चलो, क्योंकि इसमें छुपे हैं कई वार।
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