स्त्रियां लौट आती हैं...
स्त्रियां लौट आती हैं... मजबूत और अनुकूलनशील: पीहर या बाहर कुछ पल बिताकर, स्त्रियां उन खुशियों और यादों को संजोती हैं। अपनी चिंताओं को छुपाकर, वे हर माहौल में खुद को ढाल लेती हैं। बालिका से जिम्मेदार स्त्री: बचपन की मदमस्ती के बाद, विवाह के बाद वे जिम्मेदारियों को अपना लेती हैं। घर-गृहस्थी और नौकरी, दोनों को बखूबी संभालती हैं। काम से आकर भी, वे अपने घरेलू कामों में जुट जाती हैं। अद्भुत शक्ति और बहुमुखी प्रतिभा: उनके कार्यों को कम ना आंकें, वे अपने अंदर अनेक अवतार समेटे हुए हैं। हर पहलू को पूरी ताकत से निभाती हैं। प्रियतम के साथ बाहर जाना भी उनके लिए खास होता है। मन की व्यथा से ऊपर उठकर: काम से लौटकर, वे अपने मन की व्यथा को भुला देती हैं। विचारों को मोतियों की तरह पिरोती हैं। हर पल को त्योहार की तरह मनाती हैं। हां, स्त्रियां लौट आती हैं... अपनी शक्ति, अपने धैर्य और अपने अनुकूलनशील स्वभाव के साथ। _#स्वाति की कलम से ✍️_
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