बीतते समय से द्वंद...!!!
उम्र गुजर गई तमाम चक्रव्यूहों में जहाँ हर राह पर एक नई चुनौती थी, कुछ अनकहे द्वंद थे, तो कुछ द्वंद्वों से जीत मिली लेकिन हर जीत के साथ अभी भी एक नई परीक्षा थी! इस जीवन के अनंत पहलुओं को मैंने देखा है और उनसे फैले अंधकार को भी महसूस किया अब जाके पाया है जीवन का असली अर्थ लेकिन हर अर्थों के साथ एक नई उथल-पुथल थी पनपते झंझावातों से निकलने की भी उम्मीद थी। उम्र गुजर गई तमाम चक्रव्यूहों में जहाँ हर राह पर एक नई चुनौती थी, अब खड़ा हूँ इस जीवन के कदाचित आखिरी मोड़ पर मैं जहां तिमिर के दंभ से लड़ हुंकार भरने को एक नई उम्मीद लगाए कल की उज्जवल बेला को। उम्र गुजर गई तमाम चक्रव्यूहों में जहां हर राह पर एक नई चुनौती थी......है.....!!!!
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