जालीम
जालीम ========================== जालीम नाम सिर्फ कही दुर से सुना था, आजमाया तो बीलकुलही नही था, जो दुसरे की खुषीऔर हक, छीनने एक हद पार कर जाते है. गैरोकी तो बात ही छोडो, वो आपनोका ही गला घोटने पे.. , ऊतारु होते हे. काला जादु, बदनामी, अफवाहे...., जाने और क्या क्या......., जो बनपडे ये जालीम, कीसी को तोडने सब जोर लगा देते है. जालीम बने मेरे दोस्तो, ईतीहास सामने आके लढले वालो का , और वफादरो का होता है, जालीम बने कचरे का नाही. जालीम कचरा और लोग..., तो सिर्फ पाणी के प्रवाह मे बहनेके लिये होते है, बहने के लिये होते है. ================ ,
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