फ़नाह किसी दिन
मैं तुझसे बिछड़ के हो जाऊँगा फ़नाह किसी दिन मैं तेरे साथ भी तो किसी अज़ीयत से गुज़र रहा हूँ , जिस बेरुखी से तू मुझसे करता है बात फ़ोन पर बेहतर होता मैं किसी कस्टमर केयर वाले से बात करता !
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