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तो सवाल की आख़िरी मुलाक़ात में क्या बाते करनी होती हैं क्या लिबाज़, क्या सवाल -जवाब और क्या जज़्बात ले जानी होती हैं ? जवाब रहा जो तू रुक जा एक दफा और जो मैं रुक जाऊं एक रोज़ और कि एक बार और भीग जाते है बारिश मे बह जाने देते इन आश्को को मैं, सारे शिकवे भूला दू जो तू मुझे फिरसे बता दे कि मै अब भी वहीं तेरी पहली मोहब्बत हू जकड़े हालातो में भी पनप जाए , सुनो की मेरा हाथ पकड़ना, माफ़ी सफ़ाई नहीं तुम बस अपनी बाते कहना, आंखे ना चुराना अना मिट्टी मे मिल जाए बस तुम मुझे अपना कहना , कि धड़कने तेज़ है जवाब काश ये आख़री मुलाक़ात नए हों।
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