काश
समय समाप्ति की घंटी दिल के दौड़े जैसे बाजी और मैं प्लेटफॉर्म ए प्यार से टूटे हुए कांच की तरह बिखरे अपने उम्मीदों के करोड़ों टुकड़े संभाले, सूनेपन के गाड़ी में चढ़ गई। ना नीनो से एक अक्ष टपका, ना कदम एक शरण डगमगाए, बस रफ्तार से भर्ती सांसें मन की आवाज से चीख चीखकर बोलती रह गई, कि तुम एक आवाज दो और मैं झपटकर तुम्हारी बाहों में सदा के लिए दुनिया को भुला दूं।
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