मेरी बेटी मेरी प्रेरणा
मेरी बेटी मेरी मां बनती है करवाती है मुझसे पीटी मेरा उस्ताद बनती है देखती है जब चुपके से मुझे खाते हुवे मिठाई घर में कोहराम मचाती है, सबको बताती है। याद दिला देती है मुझे मेरे एनसीसी का जमाना जब मूड हो तभी मुझसे एक्सरसाइज करवाती है करती है खुद फौजी ट्रेनिंग मुझे अपने साथ बुलाती है हँसती है चिढ़ाती है मुझे अपने फिटनेस से हराती है। कभी हम भी थे उसकी तरह चपलता लिए अब पैंतीस की उम्र में बढ़ती तोंद से यारी किए सोचता हूं कैसे जाऊँगा अमरनाथ, क्या चल पाउंगा मैं केदारनाथ की चढ़ाई मुझे बार-बार झकझोरती है। तभी मेरी बेटी मेरी प्रेरणा बनती है बार बार मुझे पहाड़ पर ले जाने की जिद करती है खाने पीने में अनुशासन मुझसे हंसना सिखाती है फिर से फिट हो जाऊँ और अपनी बेटी के साथ ट्रेकिंग पर जाऊँ।
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