शीर्षक:अहमदाबाद विमान हादसा
हा !हा !विधाता ! क्या किया!खेला क्रूर खेल, काल के गाल में,कितनों को तू दिया धकेल। आखिर खता क्या थी,उन निर्दोष जनों की, इन्हें नज़र लगी आखिर, क्यों किन दुश्मनों की। काले धुएँ की लौ उठी, ज्योंही उड़ा विमान, चीखें निकली,टूटी साँसें,क्षण में बना श्मशान। हा! हा! हृदय विदारक,कितना कारुणिक दृश्य, कितनी भयावह घटना,असहनीय हृदय स्पृश्य। नर-नारी व मासूम को, क्षण में काल लील गया। कितनों का स्वप्न समाप्त,सब मिट्टी में मिल गया। कुछ के पिता और भाई, कुछ का बुझा चिराग। कितनों की सुनी हुई गोद, कुछ का उजड़ा सुहाग। उस पर क्या बीत रहा, जो अपनों को खोया है। जो भी ये देखा सुना इसे, सबका हृदय रोया है।। इस हादसे ने पूरा देश को, कर दिया है अवाक, हे प्रभु!ऐसा न कर कभी, मानव से क्रूर मजाक।। उन मृत आत्माओं को, हे ईश्वर दे दें शांति चीर, मेरा श्रद्धा सुमन उनलोगों को,भर कर लोचन नीर l। नरेंद्र सिंह,गया 12.06.2025
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