उलझा हुआ मन
ना जाने क्या उलझन है, ना जाने कैसी हलचल है, मन घूमता फिरता, ख्वाबों की दुनिया से, एक बार फिर बाहर आ गया, कुछ नमी है आंखों में, मुस्कान दिख रही चेहरे पर, कौन जाने ये झूठ है या सच, क्यूं बेताब हो रही हूं मैं, ना जाने ये कैसा पागलपन है, ना जाने ये कैसी हलचल है।।
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