किस्मत की लकीरें
चहक उठी है कलिया उसके स्वागत में जिसका इंतजार किया बरसो तक। ना कोई पहचान थी और न खाई थी कोई कसमें। था तो सिर्फ एक भरोसा कि सफेद घोड़े पर नहीं दिल के दरवाजे से आकर होता की मुस्कान बकर हमेशा हमेशा के लिए धड़कन में समा जाएगा।
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