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है लिखने का शौक, बात कुछ और नहीं है अल्लाह की नेमत, खाश कुछ और नहीं कभी अल्फाज़ तो कभी जज़्बात बयां करता हूं है लफ़्ज़ों का हुनर, इसके सिवा बात कुछ और नहीं
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