इश्क़
इश्क़ तो किया, मगर देवदास हो गया, कुछ वक्त ही तो बीती थी, वो खास हो गया। पढ़ ना पाया मैं उसकी पन्नों के शब्द, ना जाने कब मैं कलम, और वो मेरा किताब हो गया।
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