प्रतिबिंब
जो मैं दूसरों के बारे में सोचता या कहता, वह मेरी अपनी छवि है। जब मैं उनकी अच्छाई देखता, तो अपनी अच्छाई पाता हूँ। जब मैं उनकी कमज़ोरियाँ देखता, तो अपनी कमज़ोरियाँ देखता हूँ। हे मन, समझो, दुनिया बस तुम्हारी ही छवि है। इस पर विचार करो और चुप रहो।
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