दोहा
मिले पहचान। ऐसी कविता मैं रचूँ, मुझे मिले पहचान। विद्या देवी शारदे, मुझमें भर दो ज्ञान।। गणपति बप्पा मोरिया, करूँ तुम्हें नित ध्यान। सुंदर रचना मैं करूँ, ऐसा दो वरदान।। छंदकाव्य के क्षेत्र में, जाने मुझे जहान। दौड़े मेरी लेखनी, मिले अलगपहचान।। करता नित अभ्यास मैं, ताकि बने पहचान। यह तो सम्भव जानिए, जब दें गणपति ध्यान।। नरेंद्र को अब ज्ञान दो, हे इक दंत गणेश। इतनी क्षमता दो मुझे, जाने देश विदेश।। नरेंद्र सिंह, 23.04.2025
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