खुदगर्ज
दिल कुचलने की यह अदा जाने कहा से आई कि अब किसी के होने न होने की परवाह छूठ गई। जिस खुड़घर्जी से भाग रहे थे जाने कब उसी में लिपट गए। आखिर इस दुनिया के तरीको ने हमारे कदर में बेपरवाही की कड़वाहट भर ही दी। अपनी हसी से अब हमने खुशी का नाता जोड़ दिया और आसुओं को कर दिया पराया। मतलबी रिश्तों को छोड़ बना ली है अपनी एक मस्ती भरी दुनिया गीले शोक्वो के वादियों से दूर सितारों से सजे सपनो के जहां में निडर होके अपने सारे ख्वाब पूरे करने
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