संक्रंदन छंद*
हे माँ मुझ पर अब दया कर, महामाया। सर पर कर रखो माँ, मिले छाया।। देवी तू मुझे दो, शरण अपना। मेरा पूर्ण हो अब, सभी सपना ।। संकट में पड़ा हूँ, उबारो अब। दुख मेरा हरो तू, निवारो सब।। तू संकट हरन हॆ, जगत माता। तेरा नाम जपना, मुझे भाता ।। तेरा ध्यान धर लूँ, सुधर जाऊँ। मैं तेरी कृपा से, निखर पाऊँ।। माँ दो भव्यदर्शन, मनोहारी। जो मेरे लिए हो, सुखदकारी।। नरेंद्र सिंह 18.03.2025
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