एक मुसाफिर
आगे मिलेंगे अनेक मुसाफिर अभी डेली ध्यान मंजिल/ लक्ष्य पर कब पासा पलट जाए ये बात ध्यान रख बूंद बूंद से भरता है घड़ा इस बात पर गौर कर जितना भटकना था भटक लिया जितना अटकना था अटक लिया अब आगे कदम बढ़ा और भूल कर इस दौर को अपनी मंजिल तय कर
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