हम
उसने चाल ओ साजिशे की दरपेश आंखों के मेरी । उसके खेल ओ सलीके पैंतरे तरीके थे इबादत सराखों पे मेरी । वाह उसके सौ चेहरे ऐ कमाल हाय उसकी नीयत ऐ ख़राब गर्द पड़ी थी क्या आंखों में मेरी । उसकी हिम्मत ऐ सलाम किया मेरा दिल सामान सीना आग करता है रातों मै मेरी । हाय क्या खूब कलाएं हुनर ऐ वफाएं ऐ जानाँ मौत आती है हर सांसों में मेरी । दीपज्योति
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