दिसंबर अकेला क्यूँ?
साल भर के वादों का किस्सा दोहराता है पुरानी यादों का हिस्सा बन जाता है महीनों में ये अलग किरदार निभाता है फिर क्यूँ दिसंबर अकेला रह जाता है यही तो कुछ बुरे का अंत और एक अच्छी शुरुआत का संदेश लाता है वो सर्द मौसम वो ठंडी हवा वो बादलों को कौन बुलाता है ये दिसंबर ही तो है जो बीती बाते याद दिलाता है जो छूट गया उसे भूलकर आगे बढ़ना यही तो सिखाता है फिर क्यूँ दिसंबर अकेला रह जाता है कोई दिसंबर सा कहा बन पाता है वो जनवरी के पास होकर भी ना मिलने का गम वो ज्यादा सपनें और उम्मीदें बहुत कम वो जो आप बीती वो गुजरी यादें वो वक़्त के फैसले यही तो सुनाता है फिर कहाँ दिसंबर अकेला रह जाता है हर महीनों की गलतियों का भार अपने सर उठाता है गलतियां ना दोहराने का सबक सिखाता है आगे सब सही होगा इन आशाओं के साथ जाता है किसने कहा दिसंबर अकेला रह जाता है ?
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