ख्वाहिश
एक ख्वाहिश है मन में, एक वादा निभायो गे क्या। में जब तेरी गलीसे गुजरू उस वक्त सामने आयोगे क्या हँसता हुआ चेहरा ना सही, गुस्से मे चेहरा दिखायो गे क्या। बार -बार ना सही, दिन मे एक बार टकराओ गे क्या। हर बार तेरे गलियों में आने के वासते सौ बहाने बतायो गे क्या। 3 साल की छुपनछुपाइको एक बार जित पायेंगे क्या। क्या तुम इन गलियों में , मुझे ढूंढ पायेंगे क्या। सामने बैठे हुए ना सही। हमसे नजर मिलायें गे क्या हम अंजान ही सही। हमसे दोस्ती का हाथ बढ़ाये गे क्या। इस जन्म ना सही, अगले जन्म निभाये गे क्या , आपके सपनों में ना सही, हमारे सपनों से बहार निकल पायेंगे क्या। हमसे ये वादा कर पायेंगे क्या?
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