सरसी छंद
जीवन है उपहार। मनुज योनि में भेज धरा पर, किये ईश उपकार। धन्य सभी मानो अपने को, जीवन है उपहार।। धन्यवाद दो जगत पिता को, दिया मनुज यह देह। जाप करो उस परम नाथ को, रखना उनसे नेह।। करो सदा सब उत्तम करनी, करना मत अपकार। धन्य सभी मानो अपने को, जीवन है उपहार।। बुद्धि मिली है मात्र मनुज को, ईश दिये वरदान। अन्य जीव की रक्षा करना, स्व कर्तव्य को मान।। मानवता को रखना स्थापित, त्यागो सभी विकार। धन्य सभी मानो अपने को, जीवन है उपहार।। आपस में सब मिलकर रह लो, वैर-भाव को त्याग। पुण्य धरा पर अब मत छेड़ो, ऊँच-नीच का राग।। नेक कर्म है करते रहना, रहना है दिन चार। धन्य सभी मानो अपने को, जीवन है उपहार।। नरेन्द्र सिंह 26.06.2025
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