पापा
आप ने हर पथ दिखाया आप की उंगली पकड़ ली शक्ति मुट्ठी में जकड़ ली जब चुनौती ताप की थी मुझ पे छाया आप की थी आप का होता न सम्बल कौन जीवन को सजाता सुख में, संकट के समय में आप हैं मेरे हृदय में यह जगत बरसात जैसा हर पिता है एक छाता आप हैं त्योहार भी हैं मां के सब श्रृंगार भी हैं आप हैं तो फ़िक्र कैसी है निछावर जान मेरी आप से पहचान मेरी दूर कर के पथ से कांटे आप ही ने दर्द बांटे आप बिन कोई नहीं जो हौसला मेरा बढ़ाता मुझ में जीवन राग डाला और ख़ुद सुख त्याग डाला मुझ को ख़ुशियों में बसाया क्षीण कर ली अपनी कायाj तन बदन अपना तपाया दिन अभावों में बिताए मुझ को सब साधन जुटाए क्या कहूं, वरदान जैसे या पिता भगवान जैसे पास जिस के भी पिता है दूर उस से हर बला है
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