मगध गौरव गीत
हे मगही! हे जय मगही माय, तोरा हम्मर परनाम हो, अप्पन मतारी धरती के नित, सत-सत करs ही सलाम हो। ई माटी में चंदर गुप्त अउ, जनमले अशोक महान हो, राजगीर के कन-कन गोवाह, जे जरासंध बलबान हो।। एही पूज धरती हे जहवां, गौतम के मिलल गयान हो, विसनु जी के चरनन से दबके, गेल गयासुर सुरधाम हो। एही दे हल गयान रोसनी, बन गेल खंडहर आझ हो, नालंदा अइसन हल जगहिया, भारत के हल सरताज़ हो।। विदेस-विदेस से आबs हला, इहाँ करे सभे पढ़ाय हो, हम्मर कलम में नै हो ताकत, जे ओकर लिखूँ बड़ाय हो। जने खोदs ईहाँ धरती के, मिलतो बहुते सामान हो, अंदर बिखरल पड़ल हे सगरो, इतिहास के बड़ प्रमान हो।। सुनs सभे मगहिया भईया, मगह पर करिहs गुमान हो, मगध माटी मगही भासा के, करs सभे मिल गुनगान हो। हे मगही! हे जय मगही माय, तोरा हम्मर परनाम हो, अप्पन मतारी धरती के नित, सत-सत करs ही सलाम हो।। नरेंद्र सिंह 13.06.2025
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
