इंसान बन
मधुमालती छंद मापनी-- 2212-2212 मानव वही सुंदर भले, जिसमें नहीं पशुता पले। सत्कर्म में गतिमान हो, जिससे नहीं अपमान हो।। मानो सही इंसान हो,ऐसा करो सम्मान हो। समझो सदैव महान हो, जीवन लगे वरदान हो।। नित-नित करो शुभ काम को, ऊँचा रखे जो नाम को। छोड़ो व्यसन फूलो फलो, निश्चय अटल सत्पथ चलो।। जाओ सदा सज्जन यहाँ,जाना नहीं दुर्जन जहाँ। उत्तम तुम्हारी भावना, देगी तुम्हें शुभकामना।। नरेंद्र सिंह
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
