स्त्री की क्रूरता
आखिर क्यों हो गयी स्त्री इतनी क्रूर? ऐसी भी क्या रहती है मजबूरी? करने लगी वो निर्मम हत्याएँ कोखजनी औलाद को फेंक रही कचरे मे, तो कहीं नाले मे😔 क्रूरता की हदें पार कर स्त्री जहर देकर ले रही पति की जान या जान लेकर काट रही टुकड़ो मे ऐसे भी कोई होता है मजबूर? आखिर क्यों हो गयी स्त्री इतनी क्रूर? वो तब तो क्रूर नही हुई जब अग्निपरीक्षा दी, तब क्रूर नही हुई जब चीरहरण हुआ जब सती प्रथा मे जिन्दा ही चिता मे जलाई जाती तब क्रूर नही हुई थी दहेज़ के लिए यातनाएं सह गई, सास के ताने सुन जीवन पर्यंत ससुराल मे रह गयी स्त्री तब क्रूर नही हुई पढ़ने से रोका गया जब, बाहर निकलने टोका गया जब, बूढ़े संग ब्याह दी गयी, उसकी इच्छा मारकर खुद की बनाई राह दी गयी, वो तब भी कहाँ क्रूर हुई थी? शराबी पति की मार सह गयी, घर के तंग हालात मे रह गयी, त्याग दिया अपने सुख को परिवार की खातिर किन्तु नही बनी वो शातिर फिर कब से स्त्री हो गयी क्रूर?😔 गर्भपात हुए, बलात्कार हुए, मनचले आवारा आशिकों के एसिड अटैक भी झेल गयी बेटे बहु के अत्याचार सही, अंत मे वृद्धाश्रम तक मे छोड़ी गयी तब भी क्रूर नही बनी फिर अब कैसे बन स्त्री इतनी क्रूर?😒 आखिर क्यों हो गयी वो इतनी क्रूर? कौन है जो मौन रह गया? किस्से, कहाँ चूक हो गयी? स्त्री का यह रूप आखिर स्त्री ने क्यों दिखाया? ये एक प्रश्न है आखिर इसका उत्तर कहाँ है? यह समाज की विडम्बना है एक गंभीर समस्या है 🙏🙏🙏🙏
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