शायद याद उन्हे भी आती होगी....
राहो मे चलते फिरते ,जब मैने चायक (प्रेमी) जोड़े को देखा बस कुछ जखम हरे हो गये हमारे, कुछ आँखो मे दृश्य दिखाई दे गये । रहा सोचता क्षण भर मै, क्या याद उन्हे भी आती होगी क्या प्रेम उन्हे भी याद आता होगा , क्या दिल उनका भी रोता होगा। रहा सोचता खड़ा अकेला , क्या मेरी वो रोक-टोक , वो तीखी सी नोक -झोक, उनका रातो मे घूमना , मेरा इस पर आक्रोशित होना क्या याद उन्हे भी आता होगा , क्या उनका भी दिल रोता होगा । क्या वो बीते लम्हे रह रह के आँखो मे छाते होंगे , क्या उनको वो फिक्र दिखाना अब भी याद आता होगा। उनका वो बाहों मे सोना, वो गुपचुप बातो का होना, और सबसे नज़रे चुराना , क्या याद उन्हे भी आता होगा क्या उनका भी दिल रोता होगा। माना की यह सब सपना था , क्योकि अब वो रात गई और वो बात गई इस मतलब सी दुनिया मे मातृ-प्रेम सम प्रेम नही पर शायद याद उन्हे भी आती होगी दिल उनका भी रोता होगा।
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