पागल दीवाना !
हाँ हूँ में पागल दीवाना तेरे नाम का.... कभी उजालों में तो कभी अंधेरों में... कभी दिल में तो कभी दिमाग में... तेरा ही नाम गुनगुनाता हूँ.... यादों में तेरी ये कम्बख्त रातें मेरी कटती नहीं, दिन मेरे ढलते नहीं, किन्तु कभी तेरी यादों में तो कभी दिल की फरियादों में काट लेता हूं जिंदगी मेरी... कभी मन मचलता है तो कभी दिल उछलता है, पर समझा देता हूँ ये कहकर उछल-मचल से गिर जाओगे.... फिर धिरे से वही पुरानी अश्रु धारा आँखों से मेरी छलकती है..... जिसको हर बार कांपते हाथों ने पौंछा है..... हाँ हूँ में पागल दीवाना तेरे नाम का... किन्तु केवल ख्वाबों में तो कभी दिल की फरियादों में.... कुछ चड़ उठा है यूँ नशा तेरे नाम का, कि एक दिन मर मिटूँगा तेरे लिए...... हाँ हाँ हूँ में वही पुराना पागल दीवाना..... _रावल
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