नीति
पूछते हैं कि युद्द क्यों रोक दिए पूरा विध्वंस करना था वर्षों की गलतियों का प्रायश्चित अभी ही करना था। कल यही कहते थे कि युद्द मत भड़काव सोशल मीडिया पर उन्मादी बताते थे अब वीर रस का गान कर रहे गिरगिटों सा रंग बदल चुके । इजराइल रूस की तरह भारत भी फंस जाता व्यापारी हथियार बेचते प्रतिद्वंदी आग और भड़काते अमेरीका चीन नोटों से अपना जेब भरते । शिखर तक पहुंचने के लिए संयम जरूरी है आत्मावलोकन जरूरी है और तैयारी जरूरी है जरूरी नहीं कि हमेशा मिसाइलें ही बरसाया जाए अज्ञात हमलावरों का शौर्य का गुणगान भी जरूरी है। सुरक्षा पारिषद में स्थायी सदस्यता भी जरूरी है अभी अपनी तकनीक का और अन्वेषण भी जरूरी है नियत साफ है ऑपरेशन सिंदूर अभी बंद नहीं हुआ परमाणु केंद्र से रिसाव की खबर को समझना भी जरूरी है।
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