प्रीति पावन
लौकिक, सममात्रिक, आधार छंद-- लहर* मापनी-- 21-211 प्रीति पावन,मान साजन । है सुहावन,मास सावन ।। प्यार यूँ कर,त्याग दे डर। जोश हो तन,होश में मन।1। झूम आकर,गीत गाकर। बाग में अब,नाच तू जब।। मस्त होकर,लाज तजकर । मोर लज्जित,हो अचंभित ।2। प्रेम में छल,जो करे खल। शुष्क जीवन,शून्य वे जन।। दुःख में वह,कष्ट में रह। जिंदगी भर,झेलता नर।3। नरेंद्र सिंह, गया 05.02.2025
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