अमर कथा
दो पल की दासता दिल मे नक्काशी कर दी सदा के लिए। पत्थर की लकीर से लिख दिया उसका नाम अपने सुनहरे कल में। अब वक्त चाहे जिस सफाई से आगे बढ़े हाथों पर छपे उसके प्याय के निशान कभी मिट ना पाए।
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