बेज़ार 🍂
ज़िंदगी से बेजार हो गया हूं मैं, मौत के पास आ गया हूं मैं, दिल कि लगता नहीं किसी से अब, उसकी गफलत समझ गया हूं मैं, ऐसे ऐसे भी लोग मिले मुझको, जिनको नामों से डर गया हूं मैं, यकीं, वफ़ा, इश्क़ बातें फजूल हैं, ये सारी हदें पार कर गया हूं मैं, गाहे—गाहे( कभी—कभी) तेरा आना—जाना, तेरी फुरसत से आशना हूं मैं, मैं जब रोता हूं लोग हंसते हैं, फितरत—ए—इंसा समझ गया हूं मैं, तेरी तन्हाई में खुदा पाया, उसकी तदबीरें जानता हूं मैं, तू जो होता तो मैं न होता आज, तेरे जाने से मिल गया हूं मैं।
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