गणतंत्र की गूंज
बलिदानों का सपना जब सच बनकर साकार हुआ, तब वीरों के लहू से ये भारत तैयार हुआ। हँसते-हँसते जिन्होंने जीवन न्योछावर कर दिया, उन अमर शहीदों ने हमें आज़ाद भारत दिया। आज सलाम करें उन वीर सपूतों को हम सब, जिनकी शहादत से बना लोकतंत्र का यह पर्व। संविधान ने सिखाया समानता का सम्मान, हर नागरिक को दिया अपने हक़ का अधिकार। पर भूल बैठे हैं हम गणतंत्र का असली अर्थ, स्वार्थ की आँधी में दब गया है उसका मर्म। आज का दिन फिर याद दिलाने आया है हमें, देश चलता है प्रेम से, नफ़रत के शोर से नहीं। प्रेम, सम्मान और एकता—यही इसकी पहचान, यही भारत की आत्मा, यही इसका अभिमान। आज का दिन याद दिलाता है बार-बार हमें, ये देश नहीं राजाओं का, जनता का है— जनता ही मालिक है, जनता ही है इसका मान, गणतंत्र है भारत, यही इसकी पहचान।
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