प्रकृति की दशा
नाश हो रही पीढ़ियां, नाश हो रहा ये जहां , तकनीकी विकास के नाम पर, हर कोई करता है छल यहां , पेड़ों को सब काट रहे, वन्य जीवों को मार रहे, स्वयं के हित के खातिर, प्रकृति को ये नाश रहे, कहते हैं मौसम बदल रहा, ना जाने क्यों धरती की गर्मी बढ़ रही, कैसे हो इसका उपचार यहां, ये मानवजनित कर्मों का फल है , जो भुगत रहा हर जीव यहां, एक पेड़ तो लगा ही लो तुम, जीवन में कुछ अच्छा कर लो, सुधर जाए दशा प्रकृति की, बना रहे ये जहां ।।
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