आज का चिंतन
आज सुबह के समाचार पत्रों के पहले पन्ने पर दो खबरें दिल दहला देनें के लिए पर्याप्त रहीं। पहली खबर थी थाईलैंड से, जहां चाइल्ड केयर सेंटर में अपनें बच्चे से न मिल पानें के जुनून की सनक में पूर्व पुलिस अधिकारी ने २४ बच्चों समेत ३७ को गोलियों से भून डाला जिसमें उसके खुद के बीवी और बच्चे भी शामिल हैं। दूसरे घटना में अमेरिका के कैलिफोर्निया में अगवा किए गए ४ सिख परिवार के सदस्यों को मौत के घाट उतार कर बगीचे में फेंक दिया गया। इन दो घटनाओं से ये देखनें को मिलता है कि, आप कहीं भी सुरक्षित नहीं हो। थाईलैंड में ये पहली बड़ी घटना रही जो उसके इतिहास में दर्ज हुई। और अमेरिका में तमाम देशों से प्रवासी नौकरी और समृद्धि के सपनों को सच करने के लिए आते हैं। आबादी के विस्फोट से भरा हमारा भारतीय भूभाग इन दोनों प्रसंगों से अलग है। जहां किन्ही विशेष परिस्थितियों और जम्मू काश्मीर के आतंकवाद के साथ ही साथ नक्सल अतिवादिता को अगर छोड़ दिया जाए तो ... पूरा भारत देश अमन और शांति के मामले में समृद्ध और विकसित देशों से कहीं बहुत आगे है। हमारे समाज में अभी सामाजिकता, संपन्नता और विपन्नता के नमूने के साथ ही साथ सजगता कहीं न कहीं जीवित है। जिस कारण चोरी, ठगी और भ्रष्टाचार को पौध भी फल फूल रही है, और सेवा भाव भी उत्तरोत्तर शिखर पर चढ़ता जा रहा है। आधुनिकता, विलासिता और फैशन परस्ती के साथ ही साथ संस्कार और धार्मिक आस्था कदम से कदम मिला कर चल रही
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