हम ब्राह्मण हैं
जप–तप त्याग कर हो कल्याण सबका, सबका भला हो यही काम हम कर रहे.. तिलक, जनेऊ और धोती धारण कर, वेद और मंत्र का ही जाप हम ले लिए.. जग को पढ़ाया हमने ज्ञान सिखाया हमने, फिर भी ना जाने क्यों बदनाम हम हो गए.. जीवन लगाया मैंने जग के कल्याण में, दस, बीस दक्षिणा में क्या लूट जग को लिए.. राज का ना लोभ मुझे मोह मुझे धर्म का है, धर्म की हो जय सदा बस प्रण यही हमने लिए.. घमंडी धनानंद का जब तोड़ना गुरुर था, तो हमने ही वीर प्रतापी चंद्रगुप्त दिए.. पुकारा युद्ध के लिए जब महाराणा क्षत्रसाल ने तो, त्याग भोजन का कर बाजीराव चल दिए.. कोसों की दूरी तय किया कुछ पल में, काट फंगस का सर क्षत्रासाल को दिए.. देश धर्म के लिए बलिदान भी हम हुए, और देश–धर्म लिए हम आज भी डटे हुए.. बिस्मिल,आजाद,गोखले रानी झांसी की, देश के लिए जो सर्वस्व अर्पण कर गए.. देश धर्म के लिए हम जिए और मरेंगे भी, हमने ये सौगंध गौ माता वेद से लिए..
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
