अथ ध्यानम्
जिनकी आकृति शांत हो, शैय्या जिनकी नाग। शतदल खिलता नाभि में, थामे जग संभाग।। गगन सदृश जो व्याप्त हैं, मेघवर्ण जगदीश। लक्ष्मी कांत कमल नयन, हे ईश्वर अवनीश।। सर्वलोक के नाथ हो, अतिशय सुंदर देह। जन्म-मरण भय मुक्त वह, जिससे करते नेह।। विष्णु विश्व आधार हैं, करे योगीगण ध्यान। नमन करूँ मैं आपको, जय सुरेश भगवान।। राम रूद्र हो आप ही, कभी बने थे श्याम। विविध रूप अवतार ले, आए जग के काम।। नरेंद्र सिंह 23.04.2025
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