बस एक सवाल
हम 76वें गणतंत्र पर खड़े हैं हाथ में तिरंगा और आँखों पर पोस्टर जिस पर लिखा है— विकसित भारत 2026 कलाम का 2020 आज भी फाइलों में सो रहा है काग़ज़ जवान हैं पर सपने बूढ़े हो गए। शहरों में रौशनी इतनी है कि अँधेरा दिखता नहीं और गाँवों में अँधेरा इतना है कि रौशनी पहुँचती नहीं। हम चाँद पर झंडा गाड़ आए पर धरती पर माँ की रसोई में आज भी नमक कम पड़ जाता है। धर्म सबसे तेज़ हथियार है इंसाफ़ सबसे धीमी प्रक्रिया। भीड़ तुरंत जुट जाती है पर बेटी के आँसुओं पर सिस्टम लॉग-इन ही नहीं होती है। दस मिनट में खाना दरवाज़े पर दस मिनट में ऑफ़र, कैशबैक, डिस्काउंट पर दस मिनट में एक एम्बुलेंस? सॉरी—नेटवर्क नहीं है। सच बोलो तो आवाज़ म्यूट सवाल पूछो तो देशभक्ति सस्पेंड। तो पूछता हूँ मैं बिना नारे, बिना शोर— अगर यही विकास है तो फिर हम किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं?
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