तबियत
बेवजह गम को दिखाने की जरूरत क्या है कत्ल की रात मूस्कूराने की जरूरत क्या है रूसवा है ये शहर खौफ की आहट से शम्म-ए-आँचल को जलाने की जरुरत क्या है कत्ल मे हाथ रहा होगा किसी अपने का बेवजह बात बढाने की जरूरत क्या है गम नजर आता है काँपते लबो से भी अश्क आँखों से दिखाने की जरुरत क्या है झुठ के नाम पे होती है महक रिश्तों मे ऐसे काईदा को निभाने की जरूरत क्या है राजीव...
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