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परत - दर- परत बेज़ार कर लू खुद को या दिल फेक बाज़ार कर दूं किस मुकाम पे मोहब्बत को विदा करूं दिल दुखने पे या टुकड़े होने का इतेज़ार करूं। संभलना या बिखरना धुंधली यादों का मुस्तकबिल तय हो मिलना या बिछड़ना, मुझे तू ना सही तुझे,वो हासिल हो।।
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