क्यूँ मेरे हिस्से तन्हाई आई?
किस्मत ज़िन्दगी मे क्या मोड़ लेकर आई... 😔 तन्हा दिल मेरा खुदा से अक्सर एक सवाल करता है. 🤔 कहने को तो हज़ारों अपने हैँ फिर क्यूँ मेरे हिस्से तन्हाई आई?🥺😔 बे-अक्ल दिल तू क्यूँ इतनी आशा करता है? क्यूँ खुद ही खुद का तमाशा करता है?😔😔 कैसी कश्मकश है जो कभी समझ ना आई बहुत मुश्किल है खुद की खुद से लड़ाई कहने को तो हज़ारों अपने हैँ फिर क्यूँ मेरे हिस्से तन्हाई आई? अपनी तक़दीर मे मैंने कई मंजर देखे🥺 अपनों को मेरे जज्बातों पर चलाते खंजर देखे भावनाओं मे मैंने अक्सर ठोंकर खाई 😭 कहने को तो हज़ारों अपने हैँ फिर क्यूँ मेरे हिस्से तन्हाई आई?🥺😔
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