दोहा
रंग-मंच संसार है, हमसब हैं किरदार। अभिनय करते हैं यहाँ, जीवन के दिन चार।। सुख-दुख की ये भूमिका, निभा रहे हमलोग। हँसना-रोना है अदा, दुखद-सुखद संयोग।। नरेंद्र सिंह, 25.04.2025
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