वीरांगनाएं
जब पैर रखा है रण में तो । प्राण की कदर किसे होगी। तुम चूड़ी मांगो शीश काट दे ऐसी सहल कंवर नहीं होगी । जब पैर रखा है रण में तो प्राण की कदर किसे होगी । कुछ ढाल बनी है पुत्रों की ,कुछ ने अपने सुत को त्यागा है प्रथम पर मर्यादा स्वाभिमान रहेगा हारा पति अभागा है। पहनो वाना केसरिया तुम मैं जौहर की लकड़ी रखती हूँ । कटे शीश तलवार चले । दुश्मन के सीने पर चले रक्त की आखिरी बूंद यही कही होगी। जब पैर रखा है रण में तो प्राण की कदर किसे होगी। नेहा फौजदार
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